भिलाई। पारंपरिक खेती में वनस्पति कचरे को एकत्रित करके खाद बनाने का प्रचलन था जिसे हम जैविक खाद के नाम से भी जानते है। समय के साथ रासायनिक खाद का प्रचलन बढ़ा पर इसका विपरीत असर पौधों की गुणवत्ता के साथ साथ मिट्टी की सेहत पर भी पड़ा। अब इसे बदलने का समय आ गया है। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ निहारिका देवांगन ने घर पर ही जैविक खाद बनाया है। उन्होंने इसकी विधि भी साझा की।












