आराधाना तिवारी ने बताया कि वैसे तो संप्रेषण या कम्युनिकेशन की जरूरत जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में है पर शिक्षण में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सबसे पहले आता है विषय या संप्रेषण की सामग्री। इसकी तैयारी अच्छी होनी चाहिए। इस तैयारी को हम एनकोडिंग कह सकते हैं। संप्रेषण के लिए माध्यम का होना भी जरूरी है। साधारणतया क्लासरूम में शिक्षक और शिक्षार्थी आमने सामने होते हैं पर कोविड कालखण्ड में ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। यहां श्रोता को स्वयं से जोड़े रखना एक चुनौती होती है। इसकी भी तैयारी करनी चाहिए। रोचक उदाहरणों एवं छोटे-छोटे सवालों से इसे संभव बनाया जा सकता है। श्रोता द्वारा संदेश को प्राप्त करने के बाद उसे समझना जरूरी होता है। इसे हम डीकोडिंग कहते हैं। शिक्षार्थी की प्रतिक्रिया ही फीडबैक है।
आराधना सम्प्रति एमजे कालेज के शिक्षा संकाय में सहायक प्राध्यापक हैं। उन्होंने सम्प्रेषण की बाधाओं की विस्तार से चर्चा करते हुए उनसे निपटने के तरीकों को भी बताया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनिल कुमार चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम में शिक्षा संकाय की प्रभारी डॉ श्वेता भाटिया, आईक्यूएसी प्रभारी अर्चना त्रिपाठी, एलुमनाई व्याख्यानमाला का संचालन एलुमनाई एसोसिएशन की संयोजक एवं शिक्षा संकाय की सहायक प्राध्यापक मंजू साहू ने किया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में 60 से अधिक लाभार्थी जुड़े रहे।












