दुर्ग। नीति एवं मूल्य आधारित जीवन और विश्रृंखल जीवन में वही अंतर होता है जो एक सुन्दर बगीचे और जंगल में होता है। चिकित्सा, सामाजिक, राजनीतिक, पर्यावरणीय मूल्यों को जीवन में उतारकर हम स्वयं के जीवन को सभी के लिए उपयोगी बना सकते हैं। इससे जीवन की खूबसूरती भी बढ़ जाती है। उक्त उद्गार पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ भगवंत सिंह ने कहीं।












