भिलाई। संत कबीरदास जी के 15वीं शताब्दी के दोहे मानव जीवन को सूत्र देते हैं। गहन अध्ययन से निकले ये दोहे आज भी न केवल प्रासंगिक हैं बल्कि तनावमुक्त जीवन की राह बताते हैं। उन्होंने अहंकार, असत्य और अहिंसा से दूर रहने की सलाह दी थी जो तब से आज तक सभी संकटों के मूल में पाए जाते हैं।












