भिलाई। शासकीय वीवायटी महाविद्यालय दुर्ग के संस्कृत विभागाध्यक्ष जनेद्र कुमार दीवान ने आज कहा कि जो शिष्य गुरु के मार्गदर्शन में चलते हैं वे कुल, वंश, देश का नाम रोशन कर जीवन को कृतार्थ करते हैं। महर्षि वेदव्यास और गुरु-शिष्य परम्परा का वर्णन करते हुए उन्होंने वेद, रामायण, महाभारत, पुराण कालीन प्रसंगों का उल्लेख किया। साथ ही वशिष्ठ-राम, सान्दीपनी-कृष्ण, परशुराम-कर्ण, चाणक्य-चन्द्रगुप्त आदि गुरु-शिष्य के प्रसंग सुनाए।












