भिलाई। बौद्धिक संपदा वर्षों की मेहनत का परिणाम होती है। शोधार्थियों को इसकी चोरी करने से बचना चाहिए। यदि किसी की बौद्धिक संपदा का उपयोग करना आवश्यक हो तो इसके लिए अनुमति लेना जरूरी होता है। उक्त बातें आज डॉ आयुष खरे ने बौद्धिक संपदा अधिकार पर आयोजित वेबीनार के पहले सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। इस ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन एमजे कालेज भिलाई तथा एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कालेज प्रयागराज द्वारा एमओयू के तहत किया गया है।












