भिलाई। न्यूरोसर्जन्स की टीम मरीज के दिमाग की सर्जरी करती रही और वह उनसे बातें करता रहा। मरीज को इस बात का अहसास तो था कि उसके सिर के भीतर कुछ हो रहा है पर उसे दर्द का कोई अहसास नहीं था। दरअसल मस्तिष्क में दर्द का अहसास जगाने वाले रेशे नहीं होते। न्यूरो सर्जन डॉ राहुल झामड़ ने बताया कि यह सब संभव हो पाया लोकल एनेस्थीसिया और मामूली सेडेटिव्स की मदद से।












