भिलाई। युवाओं की अपनी दुनिया है। बच्चे अब वो रहे नहीं और दुनिया उन्हें वयस्क नहीं मानती। इस उधेड़बुन में स्वयं को तलाशती उनकी अपनी राहें हैं। एक तरफ जीवन की उलझन है तो दूसरी तरफ भावनाओं की कशिश। भावनाएं अभिव्यक्ति चाहती हैं पर आसपास कोई सुनने वाला नहीं। ऐसे में संगीत सहज ही वह माध्यम बन जाता है जो उन्हें दुनिया भर के युवाओं से जोड़ देता है। श्रोता के रूप में, गायक के रूप में या फिर साजिन्दे के रूप में। नमोनिता “मिष्टी” ने भी यही राह चुनी और जा पहुंची अंतरराष्ट्रीय मंच पर।












