भिलाई। अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन्द्र सतपथी का मानना है कि अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में हमारे माता-पिता स्थाई लॉक-डाउन और आइसोलेशन जैसी परिस्थितियों में जी रहे हैं। जब हम साल-छह महीने के लॉकडाउन में हांफ सकते हैं तो अंदाजा लगा सकते हैं कि उनपर क्या बीतती होगी। श्री सतपथी संधान संस्थान एवं कुटुम्ब समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित संगोष्ठि “वरिष्ठ नागरिक और हमारा सामाजिक दायित्व” को संबोधित कर रहे थे।












