दुर्ग। शास. वि. या. ता. स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के हिंदी विभाग द्वारा बसंत पंचमी के अवसर पर निराला जयंती का आयोजन गूगलमीट पर किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में एम.ए की छात्रा आरती साहनी ने निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना ‘वरदे वीणा वादिनी वर दे’ का पाठ किया। स्वागत उद्बोधन देते हुए हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ अभिनेष सुराना ने कहा कि निरालाजी और वसंत दोनों परिवर्तन के प्रतीक हैं निराला जी सरस्वती के वरद पुत्र थे। उन्होंने सरस्वती को मंदिरों, पूजापाठ व कर्मकांड से बाहर लाकर खेतों-खलिहानों में श्रमजीवी किसानों के दुख भरे जीवन में स्थापित किया।












