भिलाई। केरल और तमिलनाडू के घर-घर में जो पानी पिया जाता है, वह हल्के गुलाबी रंग का होता है. इसे एक पेड़ की छाल को उबालकर तैयार किया जाता है. किसी जमाने में इसकी शुरुआत पेयजल को शुद्ध करने के लिए किया जाता था. प्रयोगशाला में किये गये शोध ने इसके हजारों औषधीय गुणों का खुलासा किया है. केरल के लोगों को मुंहासे नहीं आने के पीछे भी इसका बहुत बड़ा योगदान है. यह हृदय, किडनी और पैन्क्रियाज को स्वस्थ रखने में मदद करता है.












