यहां की कन्या दहेज में लेकर आती है बीयर का पेड़
जगदलपुर। शराब हमेशा से आदिवासी संस्कृति का हिस्सा रही है. बस्तर में सल्फी, ताड़ी, महुआ, छिंदरस सभी स्थानीय शराब में शामिल हैं. इनमें से सल्फी का विशेष महत्व है. कहते हैं जिसके घर सल्फी का एक पेड़ होता है, उसे कभी नगदी का अभाव नहीं होता. यही कारण है कि बस्तर के आदिवासी समाज में विवाह के दौरान कन्या सल्फी का पौधा लेकर आती है. सल्फी को बस्तर का बीयर भी कहा जाता है.












