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Guest lecture on Hindi Literature

दुर्ग। “रचनाकार देश-प्रदेश के किसी भी कोने का क्यों न हो, मूलतः वह रचनाकार ही होता है। उसे स्थानीयता में सीमित नहीं किया जा सकता। साहित्य में समकालीनता काल-विशेष तक सीमित नहीं होती बल्कि रचना की गति और अनुभव का खरापन उसे समय से जोड़ता है। इसी अर्थ में किसी भी युग का रचनाकार हमारा समकालीन हो सकता है।”

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