15 साल याने कि डेढ़ दशक.. एक लंबा अरसा होता है. सरकार किसी की भी हो, इतने समय में कोई भी ऊब सकता है. यही ऊब छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में भी देखी गई थी. समय रहते नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा. 2018 के चुनाव में 90 सीट वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में उसे केवल 15 सीटें मिलीं जबकि केन्द्र में भाजपा शीर्ष पर चल रही थी. भाजपा हारी भी तो किससे, जिसका इतिहास “कंपनी-एम” भारत भूमि से मिटाना चाहती है.












