बिलासपुर। अटल यूनिवर्सिटी की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. ललिता भाटिया ने धान के छिलके, ब्रान और फलों के छिलके से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। फेंके गए धान के छिलके, ब्रान, फलों के छिलके से इथेनॉल बनाने की उनकी विधि को जर्मनी से 10 साल का पेटेंट मिला है। इथेनॉल का उपयोग पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में किया जाता है। अभी तक इथेनॉल चावल, गन्ने के शक्कर, ग्लूकोस, शोरा, महुए के फूल, आलू, जौ, मकई आदि खाद्यान्नाें से बन रहा है।












