दंतेवाड़ा। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में गीदम-बारसूर मार्ग पर फणी-नाग का मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना नागवंशी राजाओं ने की थी। विशेष अवसरों पर यहां पूजा अर्चना करने के अलावा युद्ध के लिए रवाना होने से पूर्व भी यहां पूजा अर्चना की जाती थी। आज भी यहां नागपंचमी के अवसर पर अखड़ा खेला जाता है, पहलवाल जोर आजमाइश करते हैं। वन विभाग ने इस इलाके में सर्पों की विभिन्न प्रजातियों की उपस्थिति को देखते हुए यहां पशु चराई को प्रतिबंधित कर दिया है। यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है।












