जगदलपुर. 610 साल पुरानी बस्तर दशहरा में इस साल पहली बार काछनदेवी एक कायस्थ बेटी पर सवार होंगी. इस परम्परा को काछनगादी कहते हैं. अब तक ये परम्परा पनका जाति की कन्याएं निभाती आई हैं. पर इस बार यह मौका पहली की छात्रा पीहू श्रीवास्तव को मिला है. छह साल की पीहू पिछले कई दिनों से देवी की आराधना कर रही है. उसने उपवास भी रखा है. बेल के कांटों के झूले पर बैठकर वे आज 25 सितम्बर को बस्तर के राजा को दशहरा उत्सव की अनुमति प्रदान करेंगी.












