दुर्ग. वर्तमान जीवन शैली के अनेक दुष्पपरिणामों में से एक मानसिक रोग भी है. मानसिक अस्वस्थ्ता के बारे में अधिकतर लोग अंजान है. लोगों को या तो पता ही नहीं होता या वो ये मानने को ही तैयार नहीं होते की उन्हें किसी प्रकार का मानसिक रोग है और उन्हें इसके लिए किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता है. समय पर हस्तक्षेप कर मानसिक व्याधियों को नियंत्रण में रखा जा सकता है जिससे जीवन की गुणवत्ता बनी रहती है. डॉ वावा पाटणकर कन्या महाविद्यालय में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य दिवस परिचर्चा में इसी बात पर मंथन किया गया.












