मुम्बई. भारतीय सिनेमा ने कई दौर देखे हैं. 1920 और 30 के दशक में जब मूक फिल्मों का दौर था, तब भारतीय सिनेमा भी बोल्ड था. आजादी के बाद फिल्म एडवाइजरी बोर्ड का गठन कर दिया गया. प्यार और सेक्स को दर्शाने के लिए फूलों का टकराना, बाढ़ का आ जाना, दावानल का धधक उठना जैसी प्रतीकात्मक क्लिप्स का इस्तेमाल किया जाने लगा. आज जब खुलापन अपने चरम पर है, आइए एक नजर डालते हैं मूक फिल्मों के दौर के बोल्ड किरदारों पर.












