बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है. इस भविष्य को संवारने के प्रति हम कितने संवेदनशील हैं, इसकी बानगी बिलासपुर में देखने को मिली. अवसर था 22वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का. राज्य के पांच संभागों से चुने गए 1600 खिलाड़ी छह खेलों में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे थे. कराटे, बेसबॉल, कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट और फ्लोर बॉल के लिए पहुंचे इन बच्चों के साथ वह सबकुछ दोहराया गया जिसके लिए भारत की अपनी अलग ही ख्याति है. इन खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था जहां की गई थी वहां उन्हें मच्छरों से बचाने का कोई इंतजाम नहीं था.












