“पी गया चूहा- सारी व्हिस्की ….. कड़क के बोली, कहां है बिल्ली। दुम दबाके बिल्ली भागी, चूहे की फूटी किस्मत जागी। खेल रिस्की था, व्हिस्की ने किया बेड़ा पार.” फिल्म “शराबी” का यह गीत तो आपको याद ही होगा. शराब केवल नशा करने के लिए नहीं पी जाती, कभी-कभी यह हौसला देने का भी काम करती है. भिलाई में एक श्रमिक नेता हुए हैं. नगर प्रशासन भवन में हल्ला बोलने के लिए वो पेग लगाकर जाते थे. जैसे ही इसकी खबर लगती, अधिकारी थर-थर कांपने लगते. चुटकियों में काम हो जाता. बॉलीवुड में तो इसकी खास जरूरत पड़ती रही है.












