यातायात व्यवस्था किसी भी शहर के चाल-चरित्र का आईना होती है. लोगों में कितना ‘सिविक सेंस’ है, वहां की ट्रैफिक को देखकर ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. लोग तिराहों-चौराहों पर इस तरह गाड़ी लगाते हैं कि साइड स्ट्रीट से आने वालों के लिए सड़क पर चढ़ना मुश्किल हो जाता है. कुछ लोग मोबाइल पर बात करते हुए 15-20 की रफ्तार से कार रेंगा रहे होते हैं. ऐसे लोग दूसरों को अनावश्यक ओवरटेकिंग के लिए बाध्य करते हैं. साल 2021 के लिए देश भर से जुटाए गए आंकड़ों की मानें तो सड़क हादसों में मरने वाले कुल एक लाख 55 हजार 622 लोगों में से 42 हजार 853 मौतें ओवरटेकिंग की वजह से हुई थीं.












