दुर्ग. छत्तीसगढ़ के गर्भ में जहां खनिज का अतुलित भंडार है वहीं धरती पर जल, जंगल की प्रचुरता है. सांस्कृतिक और समाजिक रूप से भी छत्तीसगढ़ बेहद समृद्ध है. फिर भी छत्तीसगढ़ को हमेशा पिछड़े राज्य के रूप में देखा गया. अब यह संस्कृति बदल रही है. हमने “बासी तिहार” मनाकर अपने खानपान को स्वीकार्यता दी, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की “हमर छत्तीसगढ़” प्रदर्शनी लोगों को हर उस चीज से जोड़ती है जिसे जानकर लोगों को आत्मगौरव की अनुभूति होगी.












