रायपुर. भारत में एक करोड़ सत्यासी लाख नेत्रहीन हैं. प्रतिवर्ष बीस हजार लोग इसमें और जुड़ जाते हैं. इनमें से अधिकांश की दृष्टि लौटाई जा सकती है पर अंधविश्वास ऐसा होने नहीं देती. मान्यता है कि इस जन्म में नेत्रदान कर दिया तो अगले जन्म में नेत्रहीन पैदा होंगे. शास्त्री बाजार के ड्रायफ्रूट व्यापारी विनोद चोपड़ा ने इस मिथक को तोड़ा है. उन्होंने जीते जी अपनी एक आंख दान कर दी और मरणोपरांत दूसरा नेत्र भी दान कर गए. हममें से अधिकांश लोग मरणोपरांत नेत्रदान कर सकते हैं और लोगों के जीवन में रौशनी ला सकते हैं.












