माना कि राजनीति में बतौलेबाजी का बड़ा महत्व है. बातों से ही माहौल बनता बिगड़ता है. लोग बातों में उलझे रह जाते हैं और नेता चुपके से उनकी जेब काट लेते हैं. बहुसंख्य हिन्दू आबादी को हिन्दू राष्ट्र का सपना दिखाया गया. वैमनस्य के बीज बोए गए. चुनावी ऊंट ने करवट भी बदला पर देश वैसा ही रहा, जैसा कि वह पहले था. 1843-44 में प्रसिद्ध दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने धर्म को जनता का अफीम बताया था. राममंदिर के बहाने यही अफीम हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण करता रहा. नई सरकार की नीतियों की तारीफें तो खूब हुईं पर उनका जमीनी प्रभाव दिखना अभी बाकी है.












