छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र. एक ऐसा अबूझ इलाका जहां के अधिकांश गांवों तक आज भी सरकार नहीं पहुंच पाई है यह एक ऐसा इलाका है जहां का कोई ढंग का नक्शा तक सरकार के पास उपलब्ध नहीं था. एक तो यहां के दुर्गम जंगल रास्ता रोकते हैं वहीं पहाड़ियों, कंदराओं में छितराए हुए छोटे छोटे गांव कार्य को दुरूह बनाते हैं. इन गांवों के रहवासी अपने अस्तित्व के आरंभ से इसी तरह जी रहे हैं. ऐसे ही दूरस्थ गांवों में कभी अकेले ईसाई मिशनरियां सक्रिय थीं. 1981 में यहां रामकृष्ण मिशन का पदार्पण हुआ.












