भिलाई। वर्षों बाद इस्पात नगरी का रंगमंच एक बार फिर आलोकित हुआ. नाट्य की नई विधाओं के साथ अष्टरंग ने सहमी हुई नारी के मन में उठ रहे तूफानों को चित्रित करने का प्रयास किया. इसी मंच पर विद्यालयीन छात्राओं ने कथा वाचन का एक नया प्रारूप प्रस्तुत किया. बलात्कार पीड़ितों के प्रति समाज के रवैये पर कुठाराघात करती हुई एकल नाट्य ने प्रेक्षकों को झकझोर दिया. 75 दिवसीय ऑनलाइन ऑफलाइन नाट्य कार्यशाला के बाद किये गये ये मंचन अपना प्रभाव छोड़ गए.












