अंडा, दुर्ग. एवरेस्ट फतह करने वाली छत्तीसगढ़ की नैना धाकड़ का मानना है कि खेलों में असंभव को संभव कर देने की शक्ति होती है. यदि बचपन से ही खेलकूद के प्रति रूझान हो तो संघर्ष, सफलता और विफलता को समान रूप से स्वीकार करने का माद्दा पैदा हो जाता है. उन्होंने कहा कि स्कूल कॉलेजों की क्रीड़ा प्रतियोगिताएं बच्चों को खेल से जुड़ने का अवसर देती हैं. नैना यहां शैलदेवी महाविद्यालय में आयोजित त्रिदिवसीय क्रीड़ा प्रतियोगिता “सृजन” के दूसरे दिन के समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रही थीं.












