छत्तीसगढ़ के गढ़ तो कब के बिखर चुके हैं. इनमें से कुछ स्थान अब पश्चिमी ओड़ीशा में हैं. कुछ गढ़ों के अवशेष मात्र बाकी है. परिवर्तन सृष्टि का नियम है. जो कल था वह आज नहीं है. जो आज है वह कल नहीं रहेगा. आज छत्तीसगढ़ के पास अपने गढ़ भले ही न रहे हों, दक्षिण कोशल का नक्शा भले बिगड़ गया हो पर 36 भाजियों की उसकी थाती आज भी सुरक्षित है. जांजगीर-चांपा जिले के बहेराडीह गांव के किसान दीनदयाल यादव ने न केवल इन 36 किस्म की भाजियों पर शोध किया है बल्कि दस्तावेजीकरण के साथ उसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है.












