दंतेवाड़ा. आदिवासी वैसे तो बेहद सादा जीवन जीते हैं पर इनकी आस्था और परम्पराएं कौतूहल जगाती हैं. एक ऐसी ही परम्परा है महुआ से महुआ की शादी की. बस्तर के आदिवासियों का मानना है कि महुआ के पेड़ों का विवाह होगा तभी तो अच्छी फसल आएगी. वनोपज आदिवासियों की जीवनरेखा है जिसमें महुआ, सल्फी आदि का प्रमुख स्थान है. जिसके घर में महुआ और सल्फी का एक-दो पेड़ हो, उसे वनग्रामों में सम्पन्न माना जाता है.












