लोकतंत्र में नेता को या तो फूल मालाएं मिलती हैं या फिर गालियां. जिसका जैसा कामकाज होगा, जनता उसे वैसा ही तोहफा देगी. पर जनता अपना फैसला मुंह पर बहुत कम सुनाती है. उसका फैसला मतपेटी से होकर सामने आता है. तब तक माहौल बनाने का काम नेताओं का होता है. कई नेता जानबूझकर ऐसी टिप्पणियां करते हैं कि वह ब्रेकिंग न्यूज बन जाए. देश भर की राजनीति में बेलगाम बयानबाजों के खिलाफ एफआईआर हो रहे हैं. पहले ही लंबित मामलों के बोझ तले कराह रही अदालतों के लिए यह बिन बुलाई मुसीबत है.












