भारतीय मनुष्य की सबसे कीमती धरोहर है उसकी नाक. इसे बचाने के लिए वह कुछ भी कर सकता है. समाज में अपनी नाक ऊंचाए रखने के लिए कर्जा लेकर खर्चा करता है. रसूखदारों की पार्टी में जाने के लिए औकात से बाहर का तोहफा खरीदता है. अपने साथ हो रहे गलत का विरोध भी केवल इसलिए नहीं करता कि कहीं सबके सामने बेइज्जती न हो जाए. गरीब और लोअर मिडिल क्लास की नाक सबसे नाजुक होती है. इसे केक काटने वाले प्लास्टिक के छुरे से भी काटा जा सकता है.












