देश ने चाहे कितनी भी प्रगति कर ली हो, शिक्षितों की आबादी भले ही तेजी से बढ़ रही हो, पर अंधविश्वास की काली साया से वह अब तक मुक्त नहीं हो पाया है. लोगों को अंधविश्वास की काली कोठरी से निकालने की गई सारी कवायदें बेअसर साबित हुई हैं. नई घटना एक माता द्वारा अपने दुधमुंहे शिशु की बलि देने से जुड़ा है. किसी तांत्रिक के कहने पर उसने अपने छह माह के शिशु को तालाब में फेंक दिया. इससे पहले उसने शिशु को स्तनपान भी कराया. अंधविश्वास, टोना टोटका और तंत्र मंत्र के नाम पर हत्या की यह कोई पहली घटना नहीं है.












