Religious Riots

Say no to fanaticism

राष्ट्र वही तरक्की कर सकता है जिसमें अमन चैन हो, सब मिलकर राष्ट्र निर्माण करें. लोकतंत्र पार्टियों को प्रतिस्पर्धा के लिए उकसाती है. यह प्रतिस्पर्धा जनहित और नवाचार के क्षेत्र में होनी चाहिए. यदि वोट की राजनीति के लिए अवाम को बांटा गया तो वही हश्र होगा जो रावण की लंका का हुआ था. दशानन रावण तो त्रिकालदर्शी थे, त्रिलोकविजयी थे, वेदों-पुराणों के महापंडित थे. उन्होंने अपने राज्य के भीतर मतों का बंटवारा शुरू किया. शैव रावण ने वैष्णव विभीषण का तिरस्कार किया और नतीजा हम सभी जानते हैं.

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