आम तौर पर शहरी लोग गांव में जाते हैं. वहां जागरूकता की बातें करते हैं. जागरूकता की बातें करने वालों में चिकित्सक, चिकित्सा सेवा कर्मी, स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों से लेकर सरकारी अमला तक शामिल होता है. हम उन्हें बताते हैं कि क्या खाएं, क्या न खाएं. सरकारी स्वास्थ्य अमला उन्हें शासन की स्वास्थ्य सुविधाओं, योजनाओं और सुपोषण कार्यक्रमों की जानकारी देता है. पिछले कुछ वर्षों से इसमें योगा का प्रचार प्रसार करना भी शामिल हो गया है. हमारी सबसे बड़ी चिंता है देश में अस्वस्थ लोगों की बढ़ती भीड़.












