जब भीड़ ही सफलता का पैमाना बन जाए तो इसे जुटाने की तकनीक पर तो नवाचार होंगे ही. मामला धर्म का हो या राजनीति का, शिक्षा का हो या मनोरंजन का, भीड़ ही आपकी सफलता का ग्राफ तय करती है. संतों-नेताओं को मुफ्त में सुनने के लिए लोग नहीं मिलते. लोगों को प्रलोभन देकर ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राली में ढोकर लाना पड़ता है. हनी सिंह को लाइव देखने-सुनने के लिए लोग 20-20 हजार रुपए तक के टिकट खरीदते हैं. बेकाबू भीड़ बाउंसरों के पसीने छुड़ा देती है. इन कार्यक्रमों में हनी सिंह बेलगाम होता है. वह मंच से गालियां बकता है. लोगों से गालियां रिपीट करवाता है.












