Vandebharat

Utopia burst, Vande Bharat discontinued

देश की एक बड़ी आबादी यूटोपिया में जी रही है. यह आबादी का वह हिस्सा है जो बातों-बतोलेबाजियों में ज्यादा यकीन करता है. यह केन्द्रीय प्रचार तंत्र का शिकार हो गया और इसे चारों तरफ सिर्फ हरियाली ही हरियाली नजर आने लगी. पर हकीकत न तो कभी ज्यादा बदलती है और न ही बदली थी. देश को लगा कि नई सरकार के नेतृत्व में देश ने एकाएक तरक्की की राह पर कुलांचे भरना शुरू कर दिया है. दुनिया भर में जब महंगाई चरम पर है तब भारतीय मौज कर रहे हैं. लोगों की जेब में खूब पैसा है जिसपर सरकार डाका डाल सकती है.

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