चावल भारतीयों का मूल आहार रहा है. यह कम परिश्रम में तैयार होने वाला आहार है. धान से शुरू करें तो इससे पोहा, लाई, मुर्रा बनता है. चावल का भात, पुलाव, बिरयानी बनाया जा सकता है. भात को पानी में डुबोकर बासी या बोरे बनाया जा सकता है. ओड़ीशा में इसी को ठंडा पखाल और गर्म पखाल कहते हैं. बांग्ला में इसे पान्ता भात कहा जाता है. चावल को पीसकर इससे चिला, फरा, मुठिया बनाया जा सकता है. चावल के त्यौहारी व्यंजनों की तो लंबी फेहरिस्त है. इसी चावल को खाकर भारत के लोग स्वस्थ थे, मस्त थे. मोटापे का कहीं कोई नामोनिशान नहीं था.












