कभी राजा अपने दलबल के साथ शिकार खेलने के लिए जंगल जाता था. अब भालू, हाथी, बाघ, तेंदुआ भोजन की तलाश में गांव आते हैं. हाथियों को गांव और खेत-खलिहान से दूर रखने के लिए तमाम कोशिशें की जाती हैं. वन विभाग ने सोलर बिजूका, करेंट फेंसिंग, मधुक्खी बक्सा, सबकुछ करके देख लिया, कोई फायदा नहीं हुआ. दरअसल, हम इंसानों की फितरत ही ऐसी है. हमें दूध चाहिए पर गाय भैंस नहीं. शेर, भालू, चीता, हाथी चाहिए पर जंगल नहीं. हमें सिर्फ चाहिए, और चाहिए. यह भूख कभी मिटती नहीं.












