प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छह नियुक्तियां कीं. प्रदेश प्रभारी ने उनका आदेश पलट दिया. आदेशात्मक लहजे में उन्हें नियुक्तियों को रद करने को कहा गया. यह चिट्ठी मीडिया के पास भी पहुंच गई. जब मीडिया ने इसपर प्रदेश प्रभारी से सवाल पूछे तो वे बचकर निकल गईं. जब घर में ही इस तरह के लोग होंगे तो बाहरी दुश्मन की जरूरत ही क्या है? दरअसल, राजनीतिक दलों में पद और रेवड़ी में कोई खास फर्क नहीं होता. पद लोगों को खुश करने के लिए दिये जाते हैं. सभी पदों पर एक-एक आदमी बैठा हो तो घर भरा-पूरा लगता है.












