भिलाई। वैश्वीकरण के युग में भी साहित्य कोई हल्का सा शब्द नहीं, बल्कि एक भारी भरकम शब्द है. इस आशय का प्रतिपादन हेमचंद विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा ने किया. वे विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज एवं स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संस्थान के 27 वे वार्षिक अधिवेषन के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रही थीं.












