सरकार की यह सबसे बड़ी गलती है कि वह प्रत्येक व्यवस्था का निजीकरण नहीं कर रही है. जब एमटेक, पीजी, पीएचडी की डिग्री लेकर 25 हजार की नौकरी मिलेगी, तब जाकर लोगों की अक्ल ठिकाने आएगी. इसके बाद भी नौकरी दिहाड़ी मजदूरों जैसी होगी. बायोमेट्रिक्स से हाजिरी लगेगी और देर से आने वालों की आधे या पूरे दिन की तनख्वाह कट जाएगी. 20 साल की नौकरी के बाद भी यदि कंपनी को नाराज किया तो खड़े पैर नौकरी से निकाल दिये जाएंगे. सरकार ने लोगों को नौकरी क्या दे दी, अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली.












