भारत में ठगी का इतिहास दो सौ साल से भी ज्यादा पुराना है. ठग पहले लोगों के साथ घुलमिल जाते और फिर मौका देखकर उनकी हत्या कर उनका सबकुछ लूट लेते. इसके बाद लाशों को जमीन में गड़ा देते और खुद गायब हो जाते. 1790 में इसकी शुरुआत बहराम खां और आमिर अली नामक दो ठगों ने की. बहराम खां का नाम 936 हत्याएं करने के लिए सीरियल किलर के रूप में गिनीज बुक में भी दर्ज हुआ. ठगों के इस गिरोह का खात्मा 1835 में विलियम स्लीमैन ने किया.












