भिलाई। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में त्यौहारों, पर्वाे का विशेष महत्व है. इसकी शुरुआत हरेली से होती है. श्री शंकराचार्य महाविद्यालय अपनी कला एवं परंपरा को भी संजोये रखने का प्रयास करता है. इस अवसर पर महाविद्यालय में ग्रामीण परंपरा के अनुरूप नारियल दौड़ का आयोजन किया गया एवं सावन के गीत भी गाए गए. इसके अलावा महाविद्यालय के प्राध्यापकों को अपनी-अपनी रचनात्मकता दिखाने का भी अवसर मिला.












