यह घटना महाभारत काल की है. लाक्षा गृह अग्निकांड से किसी तरह प्राण बचाकर भागे पांडव अपनी माता कुंती एवं पत्नी द्रौपदी के साथ छत्तीसगढ़ के जंगलों में पहुंचे. उन्होंने एक ऊंची पहाड़ी पर एक सुन्दर वाटिका देखी. वाटिका निर्जन प्रतीत हो रही थी. पांडवों ने कुछ दिन यहीं विश्राम करने का मन बना लिया.












