नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बलात्कार के झूठे मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि ऐसे आरोप निर्दोष व्यक्तियों के जीवन पर “कभी न भरने वाले घाव” छोड़ देते हैं। अदालत ने इन मामलों की कड़ी जांच-पड़ताल करने का आह्वान किया है ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके और कानून का दुरुपयोग रोका जा सके। न्यायमूर्ति स्वर्णलता शर्मा एक ऐसे मामले की सुनवाई कर ही थीं जिसमें पीड़िता ने अपने आरोप वापस ले लिये थे। इसके बाद सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया था।












