सिर्फ आधा घंटा साइकिल चलाने के फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप
भिलाई। साइकिल कभी यातायात का सबसे सुगम साधन हुआ करती थी। हर घर में साइकिल हुआ करती थी। बच्चे अपने पिता की साइकिल पर ही साइकिल चलाना सीखते थे। साइकिल चलाने में किसी तरह की लज्जा नहीं आती थी। वक्त बदला, लोगों के पास चार पैसे क्या आ गए कि बच्चे स्कूल कालेज भी स्कूटी और बाइक से जाने लगे। यदि साइकिल चलाते रहते तो शायद उन्हें उतनी नई-नई बीमारियां नहीं होतीं जिसकी चपेट में आकर आज वो हांफ रहे हैं।

साइकिल थेरेपी के जानकार कहते हैं कि प्रतिदिन 30से 45 मिनट तक साइकिल चलाकर आप हृदय रोग, फेफड़े की बीमारियों से तो खुद को बचा ही सकते हैं, साथ ही इससे आपका इम्यून सिस्टम भी बढ़िया रहता है। यही नहीं यह मनो मस्तिष्क को भी तरोताजा कर देता है। साइकिल चलाना एक एरोबिक व्यायाम है जो मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है और शुगर व हृदय रोगों का जोखिम कम करता है।
पैडल मारने से जोड़ों में साइनोवियल फ्लूइड (प्राकृतिक ग्रीस) का रिसाव बढ़ता है, जो घुटनों को स्वस्थ रखता है। मध्यम गति से 1 घंटे साइकिल चलाने पर लगभग 400 से 600 कैलोरी तक बर्न की जा सकती है। न्यूरोलॉजिकल समस्याओं (जैसे पार्किंसंस) और जोड़ों की जकड़न से पीड़ित लोगों के लिए साइकिल मांसपेशियों के मूवमेंट को सुधारने में बेहद मददगार है।
साइकिल चलाने से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर कम होता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह विशेष रूप से अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), डाउन सिंड्रोम और ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए लाभकारी है।
स्वास्थ्य और फिटनेस की दुनिया में “पोस्ट-साइकिल थेरेपी” उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसका उपयोग बॉडीबिल्डिंग के दौरान एनाबॉलिक स्टेरॉयड का चक्र पूरा करने के बाद किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्टेरॉयड बंद करने के बाद शरीर के प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन स्तर को सामान्य स्थिति में लाना होता है।
यदि आप फिटनेस या पुनर्वास के लिए साइकिलिंग शुरू कर रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही गति और समय (आमतौर पर 30-45 मिनट) तय करें। यदि आप स्टेरॉयड लेने के बाद पोस्ट-साइकिल थेरेपी कर रहे हैं, तो दवाओं और हार्मोनल संतुलन के लिए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) की देखरेख बहुत जरूरी होगा।
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