ISRO को छोड़कर निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की ओर भाग रहे वैज्ञानिक
बेंगलुरु। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

Bhaskar.com के मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे LVM3 प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यही लॉन्च व्हीकल गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। ISRO छोड़ने वाले कुछ वैज्ञानिक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स से जुड़ गए हैं।
2020 में केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में तेजी से स्टार्टअप्स बढ़े हैं। फिलहाल देश में 400 से ज्यादा पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप हैं। इनमें करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश आया है। पिक्सेल, ध्रुवा स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में आगे हैं।
इस्तीफों की झड़ी के बाद अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया निर्देश जारी किए हैं। नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया अब सख्त की जाएगी। इस मामले में केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO में लोग आते-जाते रहते हैं। सरकारी निर्देश में कहा गया है कि नौकरी छोड़ने के आवेदनों पर अब अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा।
इस्तीफों से ISRO को हाल के मिशनों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ISRO का “वर्कहॉर्स” माना जाने वाला PSLV एक साल के भीतर लगातार दो मिशनों में असफल रहा।
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