IVF से जुड़वा बच्चे होने का रिस्क हुआ कम, ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च में दावा
नई दिल्ली। जब कोई कपल IVF कराता है तो कई प्रेगनेंसी में जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। लेकिन अब एक रिसर्च में दावा किया गया है कि अब एक साथ जुड़वा या तीन बच्चों के जन्म का खतरा काफी कम हो सकता है। यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया के सात फर्टिलिटी क्लीनिकों में 18,396 महिलाओं पर की गई। ब्लास्टोसिस्ट और विट्रिफिकेशन तकनीक अपनाने पर 97 फीसद महिलाओं ने एक ही संतान को जन्म दिया।

2012 से 2021 के बीच पहली बार IVF कराने वाली महिलाओं के इलाज का विश्लेषण किया गया। रिसर्च में पता चला कि ब्लास्टोसिस्ट और विट्रिफिकेशन तकनीक का आईवीएफ में यूज फायदेमंद है। इन आधुनिक तकनीकों के साथ तीन IVF के भीतर लगभग 68% महिलाओं को सफलतापूर्वक बच्चा हुआ। वहीं, एक से अधिक बच्चों के जन्म की दर सिर्फ 2.9% रही।
रिसर्च में कहा गया है कि डॉक्टर गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए अधिकतर मामलों में एक साथ दो या उससे अधिक भ्रूण गर्भाशय में ट्रांसफर कर देते थे। इसक कारण कई मामलों में महिला को जुड़वा बच्चे पैदा होते । ऐसी गर्भावस्था में समय से पहले डिलीवरी से लेकर कम वजन वाले बच्चे की समस्या हो जाती थी।
ब्लास्टोसिस्ट और विट्रिफिकेशन तकनीक क्या हैं
ब्लास्टोसिस्ट और विट्रिफिकेशन तकनीक में लैब में भ्रूण को बेहतर तरीके से विकसित किया जाता है। पहले शुरुआत में ही भ्रूण को ट्रांसफर कर दिया जाता था, लेकिन अब ब्लास्टोसिस्ट तकनीक की मदद से उसे 5 से 6 दिन तक विकसित करके ट्रांसफर किया जाता है। इसके अलावा विट्रिफिकेशन नाम की तकनीक का भी यूज किया जाता है। यह एक प्रकार की आधुनिक फ्रीजिंग तकनीक है जिससे भ्रूण को सुरक्षित रखा जाता है।
मिली बेहतर सफलता
नई स्टडी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब लगभग 95 प्रतिशत मामलों में केवल एक ही भ्रूण ट्रांसफर किया गया. इसके बावजूद सफलता की दर पहले से बेहतर रही। इस रिसर्च से यह साफ हुआ कि महिलाओं को आईवीएफ कराने और बेहतर परिणाम के लिए दो भ्रूण ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे जुड़वा बच्चों की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
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