Category Archives: interviews

कब, कहां और कैसे के सलीके पर टिकी है सफलता : डॉ हिमांशु द्विवेदी

Dr-Himanshu-Dwivediभिलाई। प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक डॉ हिमांशु द्विवेदी का मानना है कि किसी बात को कब, कहां और कैसे कही जाए, इसका सलीका हो तो उद्देश्य में सफलता मिलती ही है। उन्होंने अपने जीवन के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इसका सुफल बार-बार प्राप्त होता रहा है। आईसीएआई भवन में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एकल व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में वे एकाएक ही पत्रकार बन गए थे। इसके लिए उन्हें अपने परिवार का कोप भी सहना पड़ा। दीदी ने पीएमटी पास कर एमबीबीएस में प्रवेश कर लिया था। घर वाले चाहते थे कि बेटा इंजीनियरिंग करे। पर उनका झुकाव आर्ट्स की तरफ था। वे राष्ट्रीय स्तर की भाषण प्रतियोगिता एवं वाद विवाद प्रतियोगिता जीत चुके थे। दीदी ने जहां पिता की इज्जत बढ़ा दी थी वहीं उनका कदम कथित रूप से नाक कटवाने वाला था। इसलिए परिवार ने हाथ खींच लिया।

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बांध लेती है समीर के वायलिन की तान, बना चुके हैं विश्व कीर्तिमान

Sameer Karmakar Violinभिलाई। वायलिन का करूण स्वर वैसे ही लोगों को बांध लेता है। उसपर यदि साज को भिलाई के समीर कर्मकार ने छेड़ा है तो संगीत में रुचि नहीं रखने वाले भी खिंचे चले आते हैं। कुछ ऐसा ही जादू इस्पात नगरी के इस होनहार वायलिन वादक का। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों के अलावा देश विदेश के स्तरीय कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का जादू बिखेर चुके समीर कर्मकार के नाम सबसे लंबी अवधि तक वायलिन बजाने का विश्व रिकार्ड भी है।

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माँ बनकर सास ने बढ़ाया हौसला, तब जाकर खुली ऐक्टिंग की राह

Chanchal Sahu Atrangiभिलाई। एक प्रतिष्ठित संरक्षणवादी परिवार की बहू बनने के बाद कभी सोचा नहीं था कि मंच पर या रुपहले पर्दे का सफर पूरा होगा। पर सासू माँ ने मां की तरह न केवल प्यार और दुलार दिया बल्कि अपनी बहू के सपनों को साकार करने में भी जुट गर्इं। यह कहना है कि अभिनेत्री चंचल साहू का। वे कहती हैं कि सास के प्रोत्साहन एवं पति की सहमति से ही वे इस क्षेत्र में आई हैं।

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नौकरियां निगल रही खिलाडिय़ों की प्रतिभा : नेहा

रायपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर आधारित फिल्म 'माहीÓ तो आप सभी ने देखी होगी। माही का दर्द देशभर के खिलाड़ी झेल रहे हैं। उनकी जिंदगी खेल मैदान की जगह कागजों में उलझ गई हैं। केंद्रीय बोर्ड के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे खिलाडिय़ों के खेलने के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ी खुद की प्रतिभा से कंप्रोमाइज कर रहे हैं। रायपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर आधारित फिल्म ‘माही’ तो आप सभी ने देखी होगी। माही का दर्द देशभर के खिलाड़ी झेल रहे हैं। उनकी जिंदगी खेल मैदान की जगह कागजों में उलझ गई हैं। केंद्रीय बोर्ड के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे खिलाडिय़ों के खेलने के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ी खुद की प्रतिभा से कंप्रोमाइज कर रहे हैं। 

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देश विदेश की आर्ट गैलरियों में सजी हैं इंदिरा पुरकायस्थ घोष की शिल्पकारी

रायपुर। मेरे जीवन की प्रेरणा मेरी मां है। बचपन में मां जब घर की सजावट, भाई की पढ़ाई के लिए पेंटिंग तैयार किया करती थी तो उस समय उसे देखकर मैं सोचती थी, मुझसे ऐसी पेंटिंग कभी नहीं बन पाएगी। लेकिन मां हमेशा कहती थी, जब करेगी तभी सीखेगी। धीरे-धीरे पेंटिंग बनाना शुरू किया, फिर पेंटिंग के प्रति मेरी रूचि को देखते हुए पिता ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। आज आलम यह है कि देश-विदेश की आटर्गैलरियों में मेरी बनाई मूर्ति शिल्प सजती हैं। यह बातें महाकौशल कला वीथिका में आयोजित मूर्तिशिल्प प्रदर्शन के दौरान इंदिरा पुरकायस्थ घोष ने कही।रायपुर। मेरे जीवन की प्रेरणा मेरी मां है। बचपन में मां जब घर की सजावट, भाई की पढ़ाई के लिए पेंटिंग तैयार किया करती थी तो उस समय उसे देखकर मैं सोचती थी, मुझसे ऐसी पेंटिंग कभी नहीं बन पाएगी। लेकिन मां हमेशा कहती थी, जब करेगी तभी सीखेगी। धीरे-धीरे पेंटिंग बनाना शुरू किया, फिर पेंटिंग के प्रति मेरी रूचि को देखते हुए पिता ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। आज आलम यह है कि देश-विदेश की आटर्गैलरियों में मेरी बनाई मूर्ति शिल्प सजती हैं। यह बातें महाकौशल कला वीथिका में आयोजित मूर्तिशिल्प प्रदर्शन के दौरान इंदिरा पुरकायस्थ घोष ने कही।

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विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ शांतिस्वरूप भटनागर

पद्मभूषण डॉ शांतिस्वरूप भटनागर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। आज उनका जन्मदिवस है। एक प्रख्यात रसायनशास्त्री के रूप में उन्होंने समाज को अपना योगदान देने के साथ ही कविताओं के माध्यम से भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आजाद भारत में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना, श्री भटनागर की अध्यक्षता में की गयी। इन्हें सी.एस.आई.आर का प्रथम महा-निदेशक बनाया गया। इन्हें शोध प्रयोगशालाओं का जनक कहा जाता है।

Dr. Shanti Swaroop Bhatnagar

पद्मभूषण डॉ शांतिस्वरूप भटनागर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। आज उनका जन्मदिवस है। एक प्रख्यात रसायनशास्त्री के रूप में उन्होंने समाज को अपना योगदान देने के साथ ही कविताओं के माध्यम से भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आजाद भारत में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना, श्री भटनागर की अध्यक्षता में की गयी। इन्हें सी.एस.आई.आर का प्रथम महा-निदेशक बनाया गया। इन्हें शोध प्रयोगशालाओं का जनक कहा जाता है।

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तो दीपिका पादुकोण करती शहर, शरीर व दिमाग की सफाई

बॉलिवुड की पद्मावती इन दिनों अपनी रिलीज़ फिल्म पद्मावत के प्रमोशन में जुटी हैं, इसी दौरान एक बातचीत के दौरान दीपिका पादुकोण ने कहा कि यदि उन्हें सारी जिंदगी सिर्फ एक ही काम करने को मिले तो वह साफ-सफाई का काम करना पसंद करेंगी। दीपिका कहती हैं, 'जिंदगी में अगर मुझे सिर्फ एक ही काम करने को मिलता तो मैं हर समय दिल से साफ-सफाई का काम करती, मुझे क्लीन करने का काम अच्छा लगता है फिर चाहे वह कोई गंदगी हो, शहर, देश, दिल और दिमाग की सफाई, मैं सफाई पसंद हूं, मुझे सफाई करना अच्छा लगता है।'बॉलिवुड की पद्मावती इन दिनों अपनी रिलीज़ फिल्म पद्मावत के प्रमोशन में जुटी हैं, इसी दौरान एक बातचीत के दौरान दीपिका पादुकोण ने कहा कि यदि उन्हें सारी जिंदगी सिर्फ एक ही काम करने को मिले तो वह साफ-सफाई का काम करना पसंद करेंगी। दीपिका कहती हैं, ‘जिंदगी में अगर मुझे सिर्फ एक ही काम करने को मिलता तो मैं हर समय दिल से साफ-सफाई का काम करती, मुझे क्लीन करने का काम अच्छा लगता है फिर चाहे वह कोई गंदगी हो, शहर, देश, दिल और दिमाग की सफाई, मैं सफाई पसंद हूं, मुझे सफाई करना अच्छा लगता है।’

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मराठा लक्ष्मीकांत शिर्के : जहां औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है इस फौजी की दास्तां

भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा। साल भर बाद काम पर लौटे तो लाइब्रेरी में नियुक्ति मिली। ढेरों पुस्तकें पढ़ डाली और निकल पड़े इतिहास रचने।यह कहानी है भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी लक्ष्मीकांत शिर्के की। ट्रेन हादसे में उन्हें दाहिना हाथ व बायां पैर गंवाना पड़ा।

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ब्रह्मकुमारी गीता : चरित्र का चित्रण करते हैं महाभारत के पात्रों के नाम

गुण्डरदेही। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि ज्ञान समान पवित्र करने वाला इस संसार में दूसरा कुछ भी नहीं। यदि वेद शास्त्रों से प्यार है तो कर्म सुधारें, तकदीर आपकी दासी हो जाएगी। सारे वेद शास्त्रों का सार है कि सुख देने से सुख मिलता है और दुख देने से दुख। गीता दीदी प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित रामायण महाभारत एवं श्रीमद् भगवत गीता पर आधारित सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ शिविर के द्वितीय दिवस पर शिविरार्थियों को संबोधित कर रही थीं। गुण्डरदेही। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि ज्ञान समान पवित्र करने वाला इस संसार में दूसरा कुछ भी नहीं। यदि वेद शास्त्रों से प्यार है तो कर्म सुधारें, तकदीर आपकी दासी हो जाएगी। सारे वेद शास्त्रों का सार है कि सुख देने से सुख मिलता है और दुख देने से दुख। गीता दीदी प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित रामायण महाभारत एवं श्रीमद् भगवत गीता पर आधारित सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ शिविर के द्वितीय दिवस पर शिविरार्थियों को संबोधित कर रही थीं। 

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ब्रह्मकुमारी गीता – थका हुआ मन आसुरी शक्तियों से नहीं लड़ पाता

गुण्डरदेही। योग शक्ति गीती दीदी ने कहा कि मन के अन्दर गुण और अवगुण के बीच द्वन्द्व चलता रहता है। जब मन थका हुआ होता है तब वह आसुरी शक्तियों से लडऩे में असमर्थ होता है। वह तनाव अथवा अवसाद का शिकार हो जाता है। ऐसे समय में गीता का ज्ञान उसे मोटिवेट करके अवसाद से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।गुण्डरदेही। ब्रह्मकुमारी गीता दीदी ने कहा कि मन के अन्दर गुण और अवगुण के बीच द्वन्द्व चलता रहता है। जब मन थका हुआ होता है तब वह आसुरी शक्तियों से लडऩे में असमर्थ होता है। वह तनाव अथवा अवसाद का शिकार हो जाता है। ऐसे समय में गीता का ज्ञान उसे मोटिवेट करके अवसाद से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।

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आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज – अपने भीतर भी लगाएं एक पौधा और उसे दें पानी

भिलाई। रूआबांधा स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में भक्तों को संबोधित करते हुए परम् पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने भिलाई के वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भीषण गर्मी में भी ताप का अहसास नहीं होता क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर वृक्ष लगाए गए हैं। इसी तरह लोगों को अपने भीतर भी प्रेम का पौधा लगाना चाहिए तथा उसका पालन पोषण करना चाहिए। इससे संकट और शोक के क्षणों में भी मन शांत बना रहेगा।भिलाई। रूआबांधा स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में भक्तों को संबोधित करते हुए परम् पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने भिलाई के वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भीषण गर्मी में भी ताप का अहसास नहीं होता क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर वृक्ष लगाए गए हैं। इसी तरह लोगों को अपने भीतर भी प्रेम का पौधा लगाना चाहिए तथा उसका पालन पोषण करना चाहिए। इससे संकट और शोक के क्षणों में भी मन शांत बना रहेगा।

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“कागपंथ” के लिए श्वेता पड्डा को मिला बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड

film Kagpanth Shweta Padda Best Actressभिलाई। शहर की श्वेता पड्डा को फिल्म “कागपंथ” के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड प्रदान किया गया है। 45 मिनट के इस शार्ट फिल्म को 5 में से 4 अवार्ड झटकने का सौभाग्य मिला है। यह फिल्म पूर्वाग्रह से ग्रस्त समाज की सोच और उससे होने वाली त्रासदी का खूबसूरत चित्रण करती है। यहां होटल ग्रांड ढिल्लन में पत्रकारों के साथ अपनी उपलब्धि को शेयर करते हुए श्वेता कहती हैं कि फिल्म को हरियाणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीन किया गया। फिल्म के दृश्य लोगों को रुलाते रहे, हंसाते रहे और दर्शक मस्ती में झूमते नाचते भी देखे गए।

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दिलीप कुमार साहब एक खूबसूरत संजीदा कलाकार और उससे बेहतर इंसान, सालता रहा बेऔलाद होने का गम

'मुगले आजम', 'मधुमती', 'देवदास' और 'गंगा जमुना' जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने यादगार अभिनय के लिए याद किए जाने वाले दिलीप कुमार आज 95 साल के हो गए। इसी साल अगस्त में वे अस्वस्थ हुए तो उनके मरने की खबर आ गई थी किन्तु उन्होंने मौत को चकमा दे दिया और घर लौट आए। उनकी पत्नी सायरा बानो ने तक कहा कि उनका घर लौट आना एक चमत्कार था। दिलीप कुमार और सायरा बानो बॉलीवुड के सबसे पुरानी जोड़ी में से एक है। सायरा बानो के मुताबिक दिलीप कुमार को वह तब से चाहती थीं जब वो केवल 12 साल की थीं। 1952 में रिलीज हुई 'दाग' में दिलीप कुमार को देखने के बाद वे उन्हें अपना दिल दे बैठी थीं। खूबसूरती की मिसाल सायरा बानो और मिस्टर हैंडसम दिलीप कुमार की मगर कोई संतान नहीं है। ‘मुगले आजम’, ‘मधुमती’, ‘देवदास’ और ‘गंगा जमुना’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने यादगार अभिनय के लिए याद किए जाने वाले दिलीप कुमार आज 95 साल के हो गए। इसी साल अगस्त में वे अस्वस्थ हुए तो उनके मरने की खबर आ गई थी किन्तु उन्होंने मौत को चकमा दे दिया और घर लौट आए। उनकी पत्नी सायरा बानो ने तक कहा कि उनका घर लौट आना एक चमत्कार था। दिलीप कुमार और सायरा बानो बॉलीवुड के सबसे पुरानी जोड़ी में से एक है। सायरा बानो के मुताबिक दिलीप कुमार को वह तब से चाहती थीं जब वो केवल 12 साल की थीं। 1952 में रिलीज हुई ‘दाग’ में दिलीप कुमार को देखने के बाद वे उन्हें अपना दिल दे बैठी थीं। खूबसूरती की मिसाल सायरा बानो और मिस्टर हैंडसम दिलीप कुमार की मगर कोई संतान नहीं है। 

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सुहानी शाह ने दूसरी में पढ़ाई छोड़ी और आज कारपोरेट ट्रेनर

Suhani-Shah-Santosh-Raiभिलाई। सुहानी शाह ने दूसरी में औपचारिक शिक्षा का त्याग कर दिया और अपने पसंदीदा क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया। सात साल की उम्र में अपना पहला शो करने वाली सुहानी की उम्र अभी 27 साल है और उनके पीछे 20 साल का लंबा सफल करियर है। सुहानी जादू के शो करती हैं। पणजी में माइंड केयर क्लिनिक चलाती हैं। उनकी 5 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

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गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया

रायपुर। गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया है। अशांत जिलों में दंडकारण्य परियोजना शुरू की जाएगी। शांति के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक प्रगति करने में गायत्री परिवार विशेष योगदान देगा।रायपुर। गायत्री परिवार ने नक्सल प्रभावित सात जिलों को गोद लिया है। अशांत जिलों में दंडकारण्य परियोजना शुरू की जाएगी। शांति के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक प्रगति करने में गायत्री परिवार विशेष योगदान देगा। छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए गायत्री परिवार हरिद्वार के प्रमुख प्रणव पंड्या राजनीति, धर्म, धर्मगुरु और नक्सलवाद पर खुलकर बोले।
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