Category Archives: interviews

मिसेज इंडिया यूनिवर्स अंजू साहू की पहली प्राथमिकता परिवार

Miss India Universe Anju Sahuभिलाई। अब तक तीन ब्यूटी पेजेन्ट जीत चुकीं अंजू साहू अपने परिवार और संस्कारों को पहली प्राथमिकता देती हैं। हाल ही में वायरस फिल्मस एंड एंटरटेनमेन्ट द्वारा आयोजित मिस/मिसेज इंडिया यूनिवर्स 2019 में उन्हें मिसेज इंडिया यूनिवर्स 2019 ब्यूटीफुल हेयर के खिताब से नवाजा गया है। इससे पहले कोरबा में मिस इंटेलेक्चुअल, 2010 में बेस्ट आंसर तथा 2018 में उन्हें प्राइड आॅफ छत्तीसगढ़ के खिताब से नवाजा जा चुका है। मिसेज इंडिया यूनिवर्स का खिताब जीतने के बाद गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के यहां उनका सम्मान किया गया। पूर्व केबिनेट मंत्री रमशीला साहू ने भी उनका अभिनन्दन किया। स्थानीय पार्षद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लक्ष्मीपति राजू ने भी घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी। समाज द्वारा विभिन्न मंचों पर उनका स्वागत किया गया।

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अधिकांश लोगों को नहीं होती मानसिक व्याधियों की पहचान : डॉ गुप्ता

Dr Pramod Gupta Psychiatristदेवादा। पिछले दो दशक से भी अधिक समय से मनोरोगियों के प्रति जागरूकता एवं उनके पुनर्वास की दिशा में काम कर रहे प्रसिद्ध मनोरोग चिकित्सक डॉ प्रमोद गुप्ता का मानना है कि आज भी लोगों में मानसिक व्याधियों को लेकर स्पष्ट धारणा नहीं है। समाज आज भी मनोरोग चिकित्सकों को पागल डाक्टर कहते हैं। पागल कहलाने के डर से लोग अपनी समस्याओं को लेकर मनोरोग चिकित्सालयों में आने से कतराते हैं।

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Autism : एक हादसे ने बना दिया पति की मां और सेवा ही बन गया जीवन का लक्ष्य

Arpan School Sector-4 Bhilaiभिलाई। हादसे अकसर जीवन का रुख मोड़ देते हैं। शांता के साथ भी ऐसा ही हुआ। 2008 में एक औद्योगिक हादसे ने उनके पति को मरणासन्न कर दिया। डाक्टरों ने जान तो बचा ली पर आगे के जीवन के बारे में आश्वस्त न कर सके। शांता ने पति को दोबारा खड़ा करने की ठान ली। दिन रात मां बनकर उनकी सेवा की। सफलता मिली। पति ठीक होकर काम पर लौट गए। इस हादसे ने शांता के जीवन को एक नया मकसद दे दिया। दोस्तों की सलाह पर उन्होंने Autism से प्रभावित बच्चों की जिम्मेदारी उठा ली। अब उनके अर्पण स्कूल में  35 ऐसे बच्चे हैं जिन्हें अपना कहते हुए उनके परिवारों को भी शर्म आती है।

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गोगीया सरकार का मैजिक – रह जाता सिर और पैर, धड़ हो जाता है गायब

Magician Gogiya Sarkarभिलाई। भारतीय जादू कला को नया जीवन देने वाले गोगीया सरकार का इंद्रजाल सिर चढ़कर बोलता है। कभी वे चलते पंखे के बीच से पलक झपकते गुजर जाते हैं तो कभी किसी को लड़की को बक्स में बंद कर गायब कर देते हैं। हैरानी की हद तो तब होती है जब एक लड़की का केवल सिर और पैर रह जाता है और धड़ गायब हो जाता है। इसी तरह के हैरतअंगेज खेलों का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से जादूगर गोगीया सरकार मौर्या टाकीज में कर रहे हैं। जादूगर गोगीया सरकार का कहना है कि जादू की दुनिया निजी जीवन के तनाव को कम करती है। लोगों में आशा और उत्साह का संचार करती है। उन्हें कल्पना लोक में ले जाकर उनका बचपन लौटा देती है। यह एक तरह की थेरेपी है जो लोगों को सकारात्मक सोच की ओर ले जाती है।

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सोशल मीडिया की बमबारी से खुद को बचाएं, वरना अनर्थ हो जाएगा : भावना शाह

Bhavna Shah Alliance Instituteभिलाई। लायन्स क्लब मुम्बई की प्रथम महिला गवर्नर एवं मोटिवेशनल स्पीकर भावना शाह ने विद्यार्थियों का आह्वान किया है कि वे स्वयं को सोशल मीडिया की बमबारी से बचाएं। मोबाइल आधुनिक जीवन में तकनीकी का एक वरदान है, इसे अभिशाप न बनने दें। मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से न केवल आपका आज बल्कि आपका कल भी खराब हो सकता है। भावना यहां एलियांस इंस्टीट्यूट आॅफ कॉमर्स एंड मैनेजमेन्ट द्वारा आयोजित मोटिवेशनल सेमीनार को संबोधित कर रही थीं। ‘कैसे बनाएं मोबाइल से दूरी’ और ‘कैसे करें परीक्षा की तैयारी’ पर आयोजित इस सेमीनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी का जन्म गुलाब की एक कली के रूप में हुआ है। कली का धर्म है कि वह पल्लवित हो और गुलशन को महकाए। पर अनेक कारणों से प्रत्येक कली गुलाब नहीं बन पाती। हमारा जीवन भी ऐसा ही है।

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पूरा नहीं हुआ छत्तीसगढ़ बनाने वालों का सपना : मीसा बंदी आनंद कुमार

Anand Kumar Agrawal RSSभिलाई। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता दाऊ आनंद कुमार अग्रवाल का मानना है कि जिन उद्देश्यों को लेकर छत्तीसगढ़ का गठन किया गया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ है। आज भी शोषक वर्ग हावी है। छत्तीसगढ़िया चारों तरफ पिट रहा है और बाहरी लोग राज कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ को लूटने वाले बाहरी नौकरशाह अब नेता बनकर इस लूट खसोट को जारी रखने का मंसूबा बना चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तृतीय वर्ग उत्तीर्ण दाऊ आनंद कुमार ने लगभग तीन दशक तक पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का आंदोलन चलाया। ठाकुर गौतम सिंह, डॉ विमल कुमार पाठक, प्रभुनाथ मिश्र के साथ मिलकर वे भी संघर्ष कर रहे थे।

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मदन मोहन त्रिपाठी : एक अकेले व्यक्ति ने शिक्षा से बदल दी पूरे गांव की तस्वीर

Madan Mohan Tripathi KPSभिलाई। कहते हैं एक महिला के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। पर यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति है जिसने स्वयं शिक्षित होकर पूरे गांव की तकदीर और तस्वीर बदल दी। आज उनके विस्तारित परिवार में 33 शिक्षक हैं। गांव के विपन्न परिवारों को उन्होंने शिक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों में नियोजित कर आत्मनिर्भर बना छात्र मदन मोहन त्रिपाठी की, जिन्होंने कृष्णा पब्लिक स्कूल नामक एक विशाल परिवार को जन्म दिया। आज इस समूह में 3 शहरों में 12 सीनियर सेकण्डरी स्कूलों सहित 32 स्कूल, इंजीनियरिंग समेत दो महाविद्यालय एवं एक ललित कला विद्यालय का संचालन हो रहा है। 

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कब, कहां और कैसे के सलीके पर टिकी है सफलता : डॉ हिमांशु द्विवेदी

Dr-Himanshu-Dwivediभिलाई। प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक डॉ हिमांशु द्विवेदी का मानना है कि किसी बात को कब, कहां और कैसे कही जाए, इसका सलीका हो तो उद्देश्य में सफलता मिलती ही है। उन्होंने अपने जीवन के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इसका सुफल बार-बार प्राप्त होता रहा है। आईसीएआई भवन में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एकल व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में वे एकाएक ही पत्रकार बन गए थे। इसके लिए उन्हें अपने परिवार का कोप भी सहना पड़ा। दीदी ने पीएमटी पास कर एमबीबीएस में प्रवेश कर लिया था। घर वाले चाहते थे कि बेटा इंजीनियरिंग करे। पर उनका झुकाव आर्ट्स की तरफ था। वे राष्ट्रीय स्तर की भाषण प्रतियोगिता एवं वाद विवाद प्रतियोगिता जीत चुके थे। दीदी ने जहां पिता की इज्जत बढ़ा दी थी वहीं उनका कदम कथित रूप से नाक कटवाने वाला था। इसलिए परिवार ने हाथ खींच लिया।

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बांध लेती है समीर के वायलिन की तान, बना चुके हैं विश्व कीर्तिमान

Sameer Karmakar Violinभिलाई। वायलिन का करूण स्वर वैसे ही लोगों को बांध लेता है। उसपर यदि साज को भिलाई के समीर कर्मकार ने छेड़ा है तो संगीत में रुचि नहीं रखने वाले भी खिंचे चले आते हैं। कुछ ऐसा ही जादू इस्पात नगरी के इस होनहार वायलिन वादक का। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों के अलावा देश विदेश के स्तरीय कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का जादू बिखेर चुके समीर कर्मकार के नाम सबसे लंबी अवधि तक वायलिन बजाने का विश्व रिकार्ड भी है।

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माँ बनकर सास ने बढ़ाया हौसला, तब जाकर खुली ऐक्टिंग की राह

Chanchal Sahu Atrangiभिलाई। एक प्रतिष्ठित संरक्षणवादी परिवार की बहू बनने के बाद कभी सोचा नहीं था कि मंच पर या रुपहले पर्दे का सफर पूरा होगा। पर सासू माँ ने मां की तरह न केवल प्यार और दुलार दिया बल्कि अपनी बहू के सपनों को साकार करने में भी जुट गर्इं। यह कहना है कि अभिनेत्री चंचल साहू का। वे कहती हैं कि सास के प्रोत्साहन एवं पति की सहमति से ही वे इस क्षेत्र में आई हैं।

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नौकरियां निगल रही खिलाडिय़ों की प्रतिभा : नेहा

रायपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर आधारित फिल्म 'माहीÓ तो आप सभी ने देखी होगी। माही का दर्द देशभर के खिलाड़ी झेल रहे हैं। उनकी जिंदगी खेल मैदान की जगह कागजों में उलझ गई हैं। केंद्रीय बोर्ड के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे खिलाडिय़ों के खेलने के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ी खुद की प्रतिभा से कंप्रोमाइज कर रहे हैं। रायपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर आधारित फिल्म ‘माही’ तो आप सभी ने देखी होगी। माही का दर्द देशभर के खिलाड़ी झेल रहे हैं। उनकी जिंदगी खेल मैदान की जगह कागजों में उलझ गई हैं। केंद्रीय बोर्ड के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे खिलाडिय़ों के खेलने के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ी खुद की प्रतिभा से कंप्रोमाइज कर रहे हैं। 

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देश विदेश की आर्ट गैलरियों में सजी हैं इंदिरा पुरकायस्थ घोष की शिल्पकारी

रायपुर। मेरे जीवन की प्रेरणा मेरी मां है। बचपन में मां जब घर की सजावट, भाई की पढ़ाई के लिए पेंटिंग तैयार किया करती थी तो उस समय उसे देखकर मैं सोचती थी, मुझसे ऐसी पेंटिंग कभी नहीं बन पाएगी। लेकिन मां हमेशा कहती थी, जब करेगी तभी सीखेगी। धीरे-धीरे पेंटिंग बनाना शुरू किया, फिर पेंटिंग के प्रति मेरी रूचि को देखते हुए पिता ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। आज आलम यह है कि देश-विदेश की आटर्गैलरियों में मेरी बनाई मूर्ति शिल्प सजती हैं। यह बातें महाकौशल कला वीथिका में आयोजित मूर्तिशिल्प प्रदर्शन के दौरान इंदिरा पुरकायस्थ घोष ने कही।रायपुर। मेरे जीवन की प्रेरणा मेरी मां है। बचपन में मां जब घर की सजावट, भाई की पढ़ाई के लिए पेंटिंग तैयार किया करती थी तो उस समय उसे देखकर मैं सोचती थी, मुझसे ऐसी पेंटिंग कभी नहीं बन पाएगी। लेकिन मां हमेशा कहती थी, जब करेगी तभी सीखेगी। धीरे-धीरे पेंटिंग बनाना शुरू किया, फिर पेंटिंग के प्रति मेरी रूचि को देखते हुए पिता ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। आज आलम यह है कि देश-विदेश की आटर्गैलरियों में मेरी बनाई मूर्ति शिल्प सजती हैं। यह बातें महाकौशल कला वीथिका में आयोजित मूर्तिशिल्प प्रदर्शन के दौरान इंदिरा पुरकायस्थ घोष ने कही।

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विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ शांतिस्वरूप भटनागर

पद्मभूषण डॉ शांतिस्वरूप भटनागर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। आज उनका जन्मदिवस है। एक प्रख्यात रसायनशास्त्री के रूप में उन्होंने समाज को अपना योगदान देने के साथ ही कविताओं के माध्यम से भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आजाद भारत में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना, श्री भटनागर की अध्यक्षता में की गयी। इन्हें सी.एस.आई.आर का प्रथम महा-निदेशक बनाया गया। इन्हें शोध प्रयोगशालाओं का जनक कहा जाता है।

Dr. Shanti Swaroop Bhatnagar

पद्मभूषण डॉ शांतिस्वरूप भटनागर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। आज उनका जन्मदिवस है। एक प्रख्यात रसायनशास्त्री के रूप में उन्होंने समाज को अपना योगदान देने के साथ ही कविताओं के माध्यम से भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। आजाद भारत में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना, श्री भटनागर की अध्यक्षता में की गयी। इन्हें सी.एस.आई.आर का प्रथम महा-निदेशक बनाया गया। इन्हें शोध प्रयोगशालाओं का जनक कहा जाता है।

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तो दीपिका पादुकोण करती शहर, शरीर व दिमाग की सफाई

बॉलिवुड की पद्मावती इन दिनों अपनी रिलीज़ फिल्म पद्मावत के प्रमोशन में जुटी हैं, इसी दौरान एक बातचीत के दौरान दीपिका पादुकोण ने कहा कि यदि उन्हें सारी जिंदगी सिर्फ एक ही काम करने को मिले तो वह साफ-सफाई का काम करना पसंद करेंगी। दीपिका कहती हैं, 'जिंदगी में अगर मुझे सिर्फ एक ही काम करने को मिलता तो मैं हर समय दिल से साफ-सफाई का काम करती, मुझे क्लीन करने का काम अच्छा लगता है फिर चाहे वह कोई गंदगी हो, शहर, देश, दिल और दिमाग की सफाई, मैं सफाई पसंद हूं, मुझे सफाई करना अच्छा लगता है।'बॉलिवुड की पद्मावती इन दिनों अपनी रिलीज़ फिल्म पद्मावत के प्रमोशन में जुटी हैं, इसी दौरान एक बातचीत के दौरान दीपिका पादुकोण ने कहा कि यदि उन्हें सारी जिंदगी सिर्फ एक ही काम करने को मिले तो वह साफ-सफाई का काम करना पसंद करेंगी। दीपिका कहती हैं, ‘जिंदगी में अगर मुझे सिर्फ एक ही काम करने को मिलता तो मैं हर समय दिल से साफ-सफाई का काम करती, मुझे क्लीन करने का काम अच्छा लगता है फिर चाहे वह कोई गंदगी हो, शहर, देश, दिल और दिमाग की सफाई, मैं सफाई पसंद हूं, मुझे सफाई करना अच्छा लगता है।’

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मराठा लक्ष्मीकांत शिर्के : जहां औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है इस फौजी की दास्तां

भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा। साल भर बाद काम पर लौटे तो लाइब्रेरी में नियुक्ति मिली। ढेरों पुस्तकें पढ़ डाली और निकल पड़े इतिहास रचने।यह कहानी है भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी लक्ष्मीकांत शिर्के की। ट्रेन हादसे में उन्हें दाहिना हाथ व बायां पैर गंवाना पड़ा।

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