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धूल-धुएं से करें फेफड़ों की सुरक्षा, योग अपनाएं : डॉ प्रतीक कौशिक

How to take care of your Lung Healthभिलाई। फेफड़ों को धूल तथा किसी भी प्रकार के धुएं से बचाना चाहिए। ये आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। फेफड़ों का संक्रमण निमोनिया कहलाता है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 के मुताबिक देश में प्रतिदिन 21 लोगों की मृत्यु फेफड़ों के संक्रमण के कारण हो जाती है। इनमें से 10 की मृत्यु श्वांस संबंधी गंभीर संक्रमण के कारण होती है जबकि शेष मामले निमोनिया के होते हैं। 2019 में 5 वर्ष से कम उम्र के 8 लाख बच्चों की मौत निमोनिया से हो गई। इनमें से अधिकांश की उम्र 2 वर्ष से कम थी। उक्त जानकारी हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ प्रतीक नरेश कौशिक ने विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर दी। उन्होंने भाप लेने का सही तरीका भी बताया।

भारतीय खादी डिजाइन परिषद एक्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य बनी प्रिया

Fashion Designer Priya Bawankarदुर्ग। ड्रीम जोन दुर्ग की केन्द्र प्रबंधक प्रिया बावनकर को भारतीय खादी डिजाइन परिषद की एक्जीक्यूटिव कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया है। परिषद खादी को लोकप्रिय बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के लिए काम करता है। परिषद में देश के 500 इंस्टीट्यूट तथा 50 हजार से अधिक फैशन डिजाइनर इससे जुड़े हुए हैं। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है जो खादी के पुनरुत्थान से ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।

जो मजा बासी-चटनी में है, वो ब्रेड चबाने में कहां – पद्मविभूषण तीजन

Pandvani exponent Teejan Bai

भिलाई। देश विदेश में पंडवानी की धूम मचाने वाली पद्मविभूषण तीजन बाई को बासी-चटनी बेहद पसंद है। वो कहती हैं कि परदेस में प्यार और सम्मान तो बहुत मिला, पर उनका खान-पान नहीं सुहाया। ब्रेड पर कुछ भी लगा लेते हैं और चबाते रहते हैं। जो बात भारतीय मसालेदार भोजन में है, वह उनके भोजन में नहीं। परम्पराओं को तोड़कर 13 साल पहले पंडवानी की कापालिक शैली को अपनाने वाली तीजन सफलता के उच्चतम सोपान पर हैं।

आत्मा को तृप्त करती है नृत्य की कथक शैली- डॉ सरिता श्रीवास्तव

Kathak Dr Sarita Shrivastava Bhilai

भिलाई। वैसे तो सभी नृत्य तन एवं मन को एक सूत्र में पिरोकर साध देते हैं किन्तु कथक का लचीलापन, कथा कहने की उसकी शैली आत्मा को तृप्त कर देती है। यही वजह है कि कथक का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है। कथक समय के साथ अपने स्वरूप को बदलता गया है। भावातिरेक की अपनी विशिष्टता के कारण यह मंदिर से लेकर दरबार तक, हिन्दी फिल्मों से लेकर स्कूल के मंच तक हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रहा है। यह कहना है कथक नृत्यांगना एवं गुरू डॉ सरिता श्रीवास्तव का। 

संभल कर करें विषय और कोचिंग संस्थान का चयन – डॉ प्रशांत श्रीवास्तव

Dr Prashant Shrivastava speaks on how to choose subject and career

दुर्ग। हेमचंद विश्वविद्यालय के डीन छात्र कल्याण डॉ प्रशांत श्रीवास्तव ने हाईस्कूल के विद्यार्थियों को आगाह किया है कि वे सहपाठियों की देखादेखी या परिवार के दबाव में आकर विषय का चयन न करें। चूंकि विषय को लेकर आगे उन्हें ही बढ़ना है इसलिए अपनी अभिरुचि एवं सामर्थ्य के अनुरूप ही विषय का चयन करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थाओं का चयन करते समय भी हमें युक्तियों से काम लेना चाहिए। सभी कोचिंग संस्थानों का स्तर अलग-अलग होता है। इसलिए हमें पहले डेमो क्लासेस अटेंड करना चाहिए। अनुकूल होने पर ही संस्था में दाखिला लेना चाहिए।

TEDxRCET : सदासिवन ने टाटपट्टी पर बैठने वाले बच्चों के लिए बनाया बैग कम डेस्क

Eshan Sadasivan at TEDxRCET says empathy must for research and development

लोगों की जरूरतों को समझे बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता : सदासिवन

भिलाई। शोध तभी सफल हो सकता है जब वह लोगों की जरूरतों से जुड़ा हुआ हो। यदि आप लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं तो आप उन समस्याओं का हल निकालने के लिए शोध कर सकते हैं। टाटपट्टी पर या जमीन पर बैठकर पढ़ने वाले बच्चों की रीढ़ लगातार झुकी हुई रहती है। इससे पढ़ने में परेशानी होती है और थकान भी जल्दी होती है। प्रोसॉक इनोवेटर्स ने इसका हल ढूंढा और अब 16 राज्यों के दो लाख बच्चे एक ऐसे स्कूल बैग का उपयोग कर रहे हैं जिसे डेस्क में कन्वर्ट किया जा सकता है। विभिन्न राज्य सरकारों ने इसमें रुचि दिखाई है। यह बातें प्रोसॉक इनोवेटर्स के सीईओ ईशान सदासिवन ने संतोष रूंगटा कैम्पस में टेड-एक्स आरसीईटी को संबोधित करते हुए कहीं।

TEDxRCET-2 : जल चुकी पश्चिम की रस्सी, बस ऐंठन बाकी है : दीपक वोहरा

Be prepared to take challenges says Deepak Vohra

राजनैतिक हालातों पर जमकर बोले प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार

भिलाई। पश्चिम के पास अब कुछ नहीं बचा। जनता बूढ़ी हो रही है, पैसे भी खत्म हो रहे हैं। तकनीकी क्षेत्र में भी उनका वर्चस्व समाप्त हो रहा है। बस यही बाकी रह गया है कि वे स्वयं इसे स्वीकार करें। दूसरी तरफ भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत आज शिक्षित, उच्च शिक्षित संभावनाशील युवाओं का देश है जो किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही भारत आर्थिक एवं सामरिक क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। आगे अवसर ही अवसर हैं, आप तैयार रहें। यह बातें प्रधानमंत्री के सलाहकार एवं पूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने आज संतोष रूंगटा समूह द्वारा आयोजित टेड-एक्स आरसीईटी सीजन-2 को संबोधित करते हुए कहीं।

TEDxRCET-2 : जो भी करना है प्रफेशनली करें, मिलेगी सफलता : पवन शंकर

Pawan Shankar TEDxRCET

संतोष रूंगटा ग्रुप के टेड-एक्स सीजन टू में बोले एक्टर-आंट्रप्रीनर

भिलाई। आज करियर के बेशुमार विकल्प उपलब्ध हैं। जिस भी क्षेत्र में जाना हो उसका ईमानदारी से चयन करें, उसे अपना हंड्रेड पर्सेंट दें और तैयारी प्रफेशनली करें, तभी आपको सफलता मिलेगी। टैलेंट को मौका मिलने में वक्त लग सकता है पर मिलता जरूर है। स्टार आते जाते रहते हैं पर ऐक्टर हमेशा बना रहता है। उक्त बातें टीवी धाराविक एवं बॉलीवुड एक्टर तथा आंट्रप्रीनर पवन शंकर ने कहीं। वे संतोष रूंगटा ग्रुप द्वारा आयोजित टेड-एक्स सीजन-2 को संबोधित कर रहे थे। इस बार का थीम था ‘वारियर विदिन’ (भीतर का योद्धा)।

चटख रंगों से सजा है नन्दिनी का रचना संसार, अभिव्यक्त होती है सरलता

नेहरू आर्ट गैलरी भिलाई में एकल प्रदर्शनी का शुभारंभ, युवा कलाकारों के साथ ही पहुंचे कला मर्मज्ञ भी

Nandini Verma displayes her paintings in Nehru Art Galleryभिलाई। आधुनिक जीवन शैली के नीचे कहीं दब गई है हमारी मौलिकता। खो गए हैं वो पल, जिनके लिए मन तड़पता है। सखियों का साथ बैठना, हंसना-खिलखिलाना, अभिसारिका के हाथों के कोमल स्पर्श को महसूस करना, संतान से जीवन्त सम्पर्क, नन्दिनी के चित्रों में वह सबकुछ है जो सुखद जीवन के अपरिहार्य अंग हैं। नन्दिनी की तूलिका इन प्रसंगों को चटख रंगों से जीवंत कर देती है। जीवन प्रवाह ‘फ्लो ऑफ़ लाइफ’ का उनका समृद्ध संग्रह बरबस ही आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है। उनके अमूर्त एवं साकार चित्रों में जनजीवन को भी अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी कृतियों की प्रदर्शनी नेहरू आर्ट गैलरी में गुरुवार को प्रारंभ हुई।

अष्टांग योग सीखने भिलाई आ पहुंची बुल्गारिया की बेटी थियोडोरा

Theodora Mavrova comes to India to learn Ashtang Yogaभिलाई। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक युवती किसी ऐसे देश की यात्रा कर सकती है जहां की कोई भी भाषा उसे न आती हो। थियोडोरा मावरोवा को बुल्गारियाई भाषा के अलावा कोई और भाषा नहीं आती। किसी तरह अंग्रेजी में काम चला लेती हैं। पर अष्टांग योग सीखने की ललक उन्हें भारत की धरती पर ले आती है और वह भिलाई से इसकी शुरुआत करती है। वे स्वामी श्रीस्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई में आयोजित योग कार्यशाला में शामिल होती हैं और उसे अपनी भाषा में संबोधित भी करती हैं।