Category Archives: interviews

TEDxRCET : सदासिवन ने टाटपट्टी पर बैठने वाले बच्चों के लिए बनाया बैग कम डेस्क

लोगों की जरूरतों को समझे बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता : सदासिवन

Eshan Sadasivan at TEDxRCET says empathy must for research and developmentभिलाई। शोध तभी सफल हो सकता है जब वह लोगों की जरूरतों से जुड़ा हुआ हो। यदि आप लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं तो आप उन समस्याओं का हल निकालने के लिए शोध कर सकते हैं। टाटपट्टी पर या जमीन पर बैठकर पढ़ने वाले बच्चों की रीढ़ लगातार झुकी हुई रहती है। इससे पढ़ने में परेशानी होती है और थकान भी जल्दी होती है। प्रोसॉक इनोवेटर्स ने इसका हल ढूंढा और अब 16 राज्यों के दो लाख बच्चे एक ऐसे स्कूल बैग का उपयोग कर रहे हैं जिसे डेस्क में कन्वर्ट किया जा सकता है। विभिन्न राज्य सरकारों ने इसमें रुचि दिखाई है। यह बातें प्रोसॉक इनोवेटर्स के सीईओ ईशान सदासिवन ने संतोष रूंगटा कैम्पस में टेड-एक्स आरसीईटी को संबोधित करते हुए कहीं।

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TEDxRCET-2 : जल चुकी पश्चिम की रस्सी, बस ऐंठन बाकी है : दीपक वोहरा

राजनैतिक हालातों पर जमकर बोले प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार

Be prepared to take challenges says Deepak Vohraभिलाई। पश्चिम के पास अब कुछ नहीं बचा। जनता बूढ़ी हो रही है, पैसे भी खत्म हो रहे हैं। तकनीकी क्षेत्र में भी उनका वर्चस्व समाप्त हो रहा है। बस यही बाकी रह गया है कि वे स्वयं इसे स्वीकार करें। दूसरी तरफ भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत आज शिक्षित, उच्च शिक्षित संभावनाशील युवाओं का देश है जो किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही भारत आर्थिक एवं सामरिक क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। आगे अवसर ही अवसर हैं, आप तैयार रहें। यह बातें प्रधानमंत्री के सलाहकार एवं पूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने आज संतोष रूंगटा समूह द्वारा आयोजित टेड-एक्स आरसीईटी सीजन-2 को संबोधित करते हुए कहीं।

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TEDxRCET-2 : जो भी करना है प्रफेशनली करें, मिलेगी सफलता : पवन शंकर

संतोष रूंगटा ग्रुप के टेड-एक्स सीजन टू में बोले एक्टर-आंट्रप्रीनर

Pawan Shankar TEDxRCETभिलाई। आज करियर के बेशुमार विकल्प उपलब्ध हैं। जिस भी क्षेत्र में जाना हो उसका ईमानदारी से चयन करें, उसे अपना हंड्रेड पर्सेंट दें और तैयारी प्रफेशनली करें, तभी आपको सफलता मिलेगी। टैलेंट को मौका मिलने में वक्त लग सकता है पर मिलता जरूर है। स्टार आते जाते रहते हैं पर ऐक्टर हमेशा बना रहता है। उक्त बातें टीवी धाराविक एवं बॉलीवुड एक्टर तथा आंट्रप्रीनर पवन शंकर ने कहीं। वे संतोष रूंगटा ग्रुप द्वारा आयोजित टेड-एक्स सीजन-2 को संबोधित कर रहे थे। इस बार का थीम था ‘वारियर विदिन’ (भीतर का योद्धा)।

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चटख रंगों से सजा है नन्दिनी का रचना संसार, अभिव्यक्त होती है सरलता

नेहरू आर्ट गैलरी भिलाई में एकल प्रदर्शनी का शुभारंभ, युवा कलाकारों के साथ ही पहुंचे कला मर्मज्ञ भी

Nandini Verma displayes her paintings in Nehru Art Galleryभिलाई। आधुनिक जीवन शैली के नीचे कहीं दब गई है हमारी मौलिकता। खो गए हैं वो पल, जिनके लिए मन तड़पता है। सखियों का साथ बैठना, हंसना-खिलखिलाना, अभिसारिका के हाथों के कोमल स्पर्श को महसूस करना, संतान से जीवन्त सम्पर्क, नन्दिनी के चित्रों में वह सबकुछ है जो सुखद जीवन के अपरिहार्य अंग हैं। नन्दिनी की तूलिका इन प्रसंगों को चटख रंगों से जीवंत कर देती है। जीवन प्रवाह ‘फ्लो ऑफ़ लाइफ’ का उनका समृद्ध संग्रह बरबस ही आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है। उनके अमूर्त एवं साकार चित्रों में जनजीवन को भी अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी कृतियों की प्रदर्शनी नेहरू आर्ट गैलरी में गुरुवार को प्रारंभ हुई।

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अष्टांग योग सीखने भिलाई आ पहुंची बुल्गारिया की बेटी थियोडोरा

Theodora Mavrova comes to India to learn Ashtang Yogaभिलाई। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक युवती किसी ऐसे देश की यात्रा कर सकती है जहां की कोई भी भाषा उसे न आती हो। थियोडोरा मावरोवा को बुल्गारियाई भाषा के अलावा कोई और भाषा नहीं आती। किसी तरह अंग्रेजी में काम चला लेती हैं। पर अष्टांग योग सीखने की ललक उन्हें भारत की धरती पर ले आती है और वह भिलाई से इसकी शुरुआत करती है। वे स्वामी श्रीस्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई में आयोजित योग कार्यशाला में शामिल होती हैं और उसे अपनी भाषा में संबोधित भी करती हैं।

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किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए व्यक्ति का संवेदनशील होना जरूरी : रघुरामन

संतोष रूंगटा कैम्पस में करियर मोटिवेशन वर्कशॉप ‘मार्गदर्शन’ में दिए टिप्स

N Raghuraman motivates students to recognize their potentialभिलाई। लाइफ कोच एवं स्तंभकार एन रघुरामन का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए व्यक्ति का संवेदनशील होना जरूरी है। लोगों की जरूरतों को समझकर ही हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं। यह बात सेवा, शोध, नवोन्मेष सभी क्षेत्रों में लागू होती है। श्री रघुरामन यहां संतोष रूंगटा समूह द्वारा स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित ‘मार्गदर्शन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दूसरों की जरूरतों के प्रति संवेदना ही विकास का मूलमंत्र है।

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सुन्दरता तो चली जाएगी, रह जाएगा केवल आपका खूबसूरत कार्य : मिसेस इंडिया यूनिवर्स तृषा

भिलाई। मिसेस इंडिया यूनिवर्स-अर्थ तृषा बी. तोमर का मानना है कि दैहिक सुन्दरता की एक उम्र होती है जिसके बाद उसे जाना होता है। पीछे रह जाता है केवल आपका सुन्दर कार्य। इसलिए वे कुछ ऐसा करना चाहेंगी जिससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत सुकून मिले बल्कि लोगों को भी इसका लाभ मिले और मिलता रहे। तृषा ने हाल ही में मॉरीशस में यह खिताब जीता। उन्हें आइकोनिक आईज और ब्यूटीफुल वुमन ऑफ़ द ईयर का खिताब भी दिया गया।भिलाई। मिसेस इंडिया यूनिवर्स-अर्थ तृषा बी. तोमर का मानना है कि दैहिक सुन्दरता की एक उम्र होती है जिसके बाद उसे जाना होता है। पीछे रह जाता है केवल आपका सुन्दर कार्य। इसलिए वे कुछ ऐसा करना चाहेंगी जिससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत सुकून मिले बल्कि लोगों को भी इसका लाभ मिले और मिलता रहे। तृषा ने हाल ही में मॉरीशस में यह खिताब जीता। उन्हें आइकोनिक आईज और ब्यूटीफुल वुमन ऑफ़ द ईयर का खिताब भी दिया गया।

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जहां जाकर आप प्रयास छोड़ते हैं, सफलता उससे कुछ ही दूर होती है : कुलपति डॉ पल्टा

स्वरूपानंद महाविद्यालय में कृति विद्यार्थियों का सम्मान एवं पारितोषिक वितरण

भिलाई। हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति डॉ अरुणा पल्टा ने आज विद्यार्थियों से निरंतर प्रयास करते रहने को कहा। उन्होंने कहा कि जहां जाकर हम प्रयास करना बंद कर देते हैं, सफलता उससे बस कुछ ही दूर होती है। अकसर हम प्रयासों को जहां छोड़ते हैं वहां से उसे कोई और आगे ले जाता है और सफलता का सेहरा उसके सिर बंध जाता है। डॉ पल्टा यहां स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में कृति विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं।भिलाई। हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति डॉ अरुणा पल्टा ने आज विद्यार्थियों से निरंतर प्रयास करते रहने को कहा। उन्होंने कहा कि जहां जाकर हम प्रयास करना बंद कर देते हैं, सफलता उससे बस कुछ ही दूर होती है। अकसर हम प्रयासों को जहां छोड़ते हैं वहां से उसे कोई और आगे ले जाता है और सफलता का सेहरा उसके सिर बंध जाता है। डॉ पल्टा यहां स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में कृति विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं।

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नंदिनी के चित्रों में छत्तीसगढ़ी लोक जीवन की झलक, रायपुर के गौरव गार्डन में प्रदर्शनी आज

दुर्ग। शहर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार नंदिनी वर्मा की पेंटिंग्स आज रायपुर के गौरव गार्डन में ‘द लोकल’ कार्यक्रम के तहत प्रदर्शित की गई हैं। उनकी तूलिका छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन जीवन को एक अलग नजरिये से देखती हैं। फ्लो ऑफ़ लाइफ (जीवन-धारा) की उनकी यह अभिव्यक्ति अपने परिवेश से उनके जुड़ाव को रेखांकित करती हैं। इससे पहले उनकी कृतियां देश विदेश की अनेक आर्ट गैलरियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।दुर्ग। शहर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार नंदिनी वर्मा की पेंटिंग्स आज रायपुर के गौरव गार्डन में ‘द लोकल’ कार्यक्रम के तहत प्रदर्शित की गई हैं। उनकी तूलिका छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन जीवन को एक अलग नजरिये से देखती हैं। फ्लो ऑफ़ लाइफ (जीवन-धारा) की उनकी यह अभिव्यक्ति अपने परिवेश से उनके जुड़ाव को रेखांकित करती हैं। इससे पहले उनकी कृतियां देश विदेश की अनेक आर्ट गैलरियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।

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हाथकरघा और खादी पर टिका है फैशन का भविष्य : रोहन परियार

दुर्ग। फैशन डिजाइन रोहन परियार का मानना है कि हाथकरघा और खादी ही फैशन का भविष्य है। भारत में भले ही लोग अब भी किफायती सिंथेटिक पसंद कर रहे हैं पर पर्यावरण के प्रति जागरूक विकसित राष्ट्रों में हाथकरघे से निर्मित फैब्रिक और परिधानों की अच्छी खासी डिमांड है। कोलकाता की प्रख्यात डिजाइनर शरबरी दत्ता की टीम के सदस्य रोहन मिलान फैशन वीक में शिरकत कर चुके हैं। यहां अविश एडुकॉम द्वारा आयोजित करियर सेमीनार को संबोधित करते हुए रोहन ने बताया कि हाथकरघे का मतलब आम तौर पर लोग खादी समझ लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। कांचीपुरम, माहेश्वरी, बाघ प्रिंट, चंदेरी, टसर सिल्क, बनारसी सिल्क, बालूचरी, सम्बलपुरी, कांथा स्टिच, बंधिनी, मूंगा सभी हाथकरघे पर बनती हैं।दुर्ग। फैशन डिजाइन रोहन परियार का मानना है कि हाथकरघा और खादी ही फैशन का भविष्य है। भारत में भले ही लोग अब भी किफायती सिंथेटिक पसंद कर रहे हैं पर पर्यावरण के प्रति जागरूक विकसित राष्ट्रों में हाथकरघे से निर्मित फैब्रिक और परिधानों की अच्छी खासी डिमांड है। कोलकाता की प्रख्यात डिजाइनर शरबरी दत्ता की टीम के सदस्य रोहन मिलान फैशन वीक में शिरकत कर चुके हैं। यहां अविश एडुकॉम द्वारा आयोजित करियर सेमीनार को संबोधित करते हुए रोहन ने बताया कि हाथकरघे का मतलब आम तौर पर लोग खादी समझ लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। कांचीपुरम, माहेश्वरी, बाघ प्रिंट, चंदेरी, टसर सिल्क, बनारसी सिल्क, बालूचरी, सम्बलपुरी, कांथा स्टिच, बंधिनी, मूंगा सभी हाथकरघे पर बनती हैं।

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